Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages

ललिता वैतीश्वरन । (विधा : कविता) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)

प्रिय पापा
मुझे अकेला अनाथ छोड़कर
जाने कहाँ आप खो गये ?
देश की सरहद को दुशमनों से बचाया
और खुद चिरनिद्रा में सो गये ?
आप तो कहते थे मुझे डॉक्टर बनाओगे
और देशसेवा और देशप्रेम का पहला पाठ पढ़ाओगे
क्या आप भूल गये थे कि मैं देख रही थी बाट
आज पितृ दिवस पर खाना खायेंगे सब साथ
मगर कल की शाम कुछ अजीब थी हुई कुछ ऐसी बात
सरहद पर दुशमनों ने घुसपैठ की कल पूरी रात
देशरक्षा का धर्म निभाया , दे दी अपनी जान
आप के लिए मैं नहीं देश था आपकी संतान
लोगों का क्या है ? दो आँसू दो दिन बहायेंगे
फिर अपने घर परिवार में हँसते व्यस्त हो जायेंगे
मैं और माँ सिर्फ रोते काटेंगे अब जीवन
क्योंकि आपने किया इस देश पर अपना जीवन समर्पण
मुझे फिर भी गर्व है शहीद की बेटी कहलाऊंगी
और उतनी ही कर्मण्यता से अपना देश धर्म निभाऊंगी
©️ललिता वैतीश्वरन

0
united ink

United By Ink

Leave a Reply

Your email address will not be published.

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?