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नम्रता पिल्लै। (विधा : उद्धरण) (ग्रहण | प्रशंसा पत्र)

सूर्य के तेज़ को भी एक परछाई फीका कर देती है तब सूर्य ग्रहण कहलाता है,वैसे ही जब अपने दग़ा देते है तब रिश्तों पर भी ग्रहण लगजाता है,और ज़िंदगी भर का दुःख देजाता है,एक पल में साथ छूट जाता है,जैसे सूरज भी ग्रहण के समय बेबस हो कर रह जाता है।

नम्रता पिल्लै

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