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एसिड

रवि और उसके पापा अपनी दुकान को बंद करके हॉस्पिटल की तरफ भागे थे।
रवि की बहन पर किसी ने एसिड से हमला किया था।
रवि की बहन का सारा चेहरा झुलस गया था।
पता चला कि कोई सरफिरा उसकी बहन मंजू के पीछे पड़ा था। मंजू के मना करने पर उसने इस घटना को अंजाम दिया था।
पुलिस ने आकर खबर दी कि एसिड फेंकने वाला पकड़ा गया था।
रवि और उसके पापा बहुत रो रहे थे व उस सरफिरे को भला बुरा भी कहे जा रहे थे।
अगले दिन रवि और उसके पापा को पुलिस ने उस सरफिरे को देखने पुलिस स्टेशन बुलाया।
उस लड़के को देखते ही रवि और उसके पापा के नीचे से जमीन निकल गई। वह तो वही लड़का था जो परसो रात उनकी दुकान से एसिड ले गया था। उन्होंने बहुत मना किया की वो इस तरह किसी को भी एसिड नही बेच सकते लेकिन जब उसने उन्हें ज्यादा पैसे दिए तो लालच में आकर उन्होंने उसे एसिड दे दिया।
रवि और उसके पापा की नजर मिली और फिर झुक गई।
अब वो किसको दोष दें। उन्होंने खुद अपने हाथ से मंजू को एसिड से जलाया था।

राजेश मेहरा
नई दिल्ली

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One Comment on “एसिड

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    हमारी पुरानी कहावतें गलत नहीं हो सकतीं-“जैसी करनी,वैसी भरनी।”
    “लालच बुरी बला”

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