“चुप” रहने की आसानी पर

“चुप” रहने की आसानी पर

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शालीन सिंह

आसान है चुप रहना
बहुत आसान है
बकबादियों के विवर में
चुप रहकर बचे रहना
कालों की दुनिया
में सफेदपोश हो
किसी भी अंदर के कालेपन
में घिरे रहना
कम से कम इतना तो आसान है ही कि
लोगों में ये कह कर छुट्टी पा लेंगे आप
कि बोलते रह निर्रथक बने रहते हैं
और बोल बोल कर हम
कौन से गढ़ जीत लेंगे
कम से कम चैन से सो तो लेंगे
किसी भी डर के बगैर कि
अगर सोते को जगा दिया तो
जागकर उसका कोपभाजन तो नही होंगे
बड़ी सहूलियत हैं न बोलने में
कम से कम
बकबादी आपको श्रोता समझ कर
करुणावान हो सकते हैं
अपने अंधेरे का सहचर मान सकते हैं
और रेवड़ियों के बंटवारे में
एक हिस्सा आपका भी मुकर्रर कर सकते हैं
याद रखना किसी ने कहा था
कभी किसी भी जागे हुए
को उठाना बार बार
उसे जबर्दस्ती सोने के लिए मजबूर
कर सकता है
इंसान वक़्त आने से पहले भी मर सकता है।
चुप रहना सौ को हराना है
चुप रहना एक तरह
बहरों के बीच में
गीत गाना है
चुप रह कर लोगों को
भाषा मे नंगा होता
स्खलित होता देखा जा सकता है
चुप रहकर कुंडल में बसी
कस्तूरी को पाया जा सकता है

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