Blog

हिना खालिद”शाइस्ता”। (विधा : कविता) (मेरा पहला प्यार | प्रशंसा पत्र)

45
1
image

हिना खालिद"शाइस्ता"

पहली मुहब्बत अगर सच्ची हो

खिल उठते हैं हर ओर फूल हरश्रिंगार के

महक उठती हैं सांसे

पहले प्यार का अहसास होता

सर्दी की गुनगुनी धूप सा

दिल हर गोशे को छू लेता

पहली मुहब्बत पुरसुकून बारिश सी

भीग जाए रोम -रोम

बजती हैं धड़कनों में अनूठी सी सरगम

ज़िल्द सुनहरी हो उठती है

हम ख़ूबसुरत बहुत ख़ुबसुरत हो उठते

आंँखों में जागते हैं ख़्वाब कई

सोता नहीं कोई सारी सारी रैन

सपने ले जाते हैं तिलिस्म की दुनिया में

वहांँ मिलता है अजनबी कोई

कैद कर लेता रूह को हमारी

साथ रहता वो हमारे

बन परछाई उजली- उजली सी

जिस्म लौट आता है ,

कुछ जज़्बातों की आंँधी लिए

हम खो जाते हैं

जिस दिन किसी के हो जाते हैं

कुछ थी ऐसी ही #मेरी पहली मुहब्बत

शबनम की बूंँदों सी पाक

 

हिना खालिद”शाइस्ता

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes:

<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?