सरिता तिवाडी (पारीक ) ( समय प्रतियोगिता | युगान्तकारी रचना हेतू प्रशंसा पत्र )

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सरिता तिवाडी (पारीक )

उठो चांदनी । बहुत देर हो गई
फिर हमें शहर भी जाना है । तेरी आगे की पढ़ाई के लिए किसी अच्छे कॉलेज का पता करने ।
इतना सुनते ही चांदनी जल्दी से उठी और अपने पिता को गले लगा लिया । बोली सच बाबा ! आप मुझे शहर भेजोगे पढ़ने।
हा बेटा ! अब तैयार हो जाओ
ऐसा कहकर रामू चाचा बाहर पडौस वाली काकी के पास चले गए । और उन्हें बताया कि वो चांदनी को मेडिकल की पढ़ाई करने बाहर भेज रहे हैं ।
काकी चिल्लाई तेरा दिमाग खराब हो गया हैं क्या ? बिन माँ की बच्ची है जवान है और तू अकेले शहर भेज रहा है इसे ! इतना पढ़ लिया बहुत है । कोई गांव की लड़की बाहर नही गई पढ़ने तूने इसे लाड़ में ज्यादा ही बिगाड़ लिया हैं काकी ने रामू चाचा को डांटते हुए कहा । गांव में सबने इस बात का विरोध किया पर रामू चाचा बेटी की इच्छा को देखते हुए अपनी बात पर अडिग रहे और बोले ये मेरी चांदनी है अपने गांव को रोशन करेगी । अब समय बदल गया है हमे भी बदलना होगा । ऐसा कहकर चांदनी को लेके शहर आ गए । चांदनी मन लगाकर मेडिकल की पढ़ाई करने लगी । पहला साल ही उसने टॉप किया ।
कुछ दिन की छुट्टियां लेके वो गांव आयी और सबसे घुलमिल कर खूब बाते की । अचानक एक बच्चा चिल्लता हुआ आया और बोला … कुए का पानी पीने से बच्चे बेहोश हो रहे है । इतना सुनते ही चांदनी भागी तो देखा की हालात गंभीर हो रहे है बहुत से गांव वाले और बच्चे बेहोश हो रहे हैं । समस्या यह थी अब कि गांव में कोई डॉक्टर नही था । अब तो उसे ही कुछ करना होगा ऐसा चांदनी सोचने लगी । चांदनी ने जो प्रथम वर्ष में पढ़ा उसी सूझबूझ से काम लेते हुए प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया और अपने कॉलेज की मेडिकल टीम को बुलाकर स्थति को नियंत्रित कर लिया । बहुत बड़ी जन हानि होने से बचा लिया ।
अब सब लोग चांदनी की तारीफ करने लगे और रामू चाचा से बोले कि आपने अच्छा किया उस समय हमारी बात नही मानी और चांदनी बिटिया को पढ़ने शहर भेज दिया । आज चांदनी बिटिया नही पढ़ती तो इस मुसीबत का सामना करना हम सब के लिए मुश्किल हो जाता । काकी ने भी कहा….. रामू तूने सही कहा समय के साथ बदलना जरूरी है । और चांदनी बिटिया को भीगी आँखों से आशीर्वाद दिया और वापस कालेज के लिए विदा किया।

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