सरिता तिवाड़ी। (विधा :लघुकथा) (एक पैगाम पिता के नाम | प्रशंसा पत्र)

सरिता तिवाड़ी। (विधा :लघुकथा) (एक पैगाम पिता के नाम | प्रशंसा पत्र)

156
1
image

सरिता तिवाड़ी

कमली …. माँ माँ मुझे भी मेला देखने जाना हैं । मेरी सब सहेलियां वहाँ गई और बहुत सारी सुंदर सुंदर चूड़ियां लेके आयी ।माँ मुझे भी ले चलो ना मेले। रंग बिरंगी चूड़ियाँ पहननी हैं।
माँ उसे डांटते हुए समझाती हैं . …अरे पगली लोग क्या कहेंगे तूने चूड़ियां पहनी तो !
तेरी किस्मत में नहीं ये सब मेरी बेटी । तू बाल विधवा हैं । तेरी दुनिया अब सफेद साड़ी ही हैं । रंगों से तेरा कोई लेना देना नहीं । ऐसा कहते हुए वो रोने लगी । अब कमली मासूमियत से अपनी माँ के आंसू पोंछते हुए बोली ! माँ ये बाल विधवा क्या होता हैं ? अब क्या में होली वाले दिन होली भी नहीं खेलूंगी । मां मुझे तो रंग बहुत पसंद हैं । सब मेरी सहेलियां होली खेलेगी और गणगौर को रंग बिरंगी चूड़ियां पहनेगी तो मैं क्यों नहीं माँ । मेरा बहुत मन है माँ दिला दो ना ।
अपनी बेटी का जिद और पत्नि की हालत को देखकर कमली के पिता (श्यामू) मन ही मन पसीज रहे थे । और अपनी बेटी की किस्मत पर भगवान से शिकायत भी कर रहे थे कि हे विधाता इस मासूम का क्या दोष हैं जो बचपन में इसकी शादी कर दी और अब ये विधवा का जीवन यापन करे । अब मन ही मन फैसला लिया कि मैं इन सब रूढ़िवादी परम्पराओं को तोडूंगा अपनी बेटी के भविष्य के लिए । चाहे मुझे इसके लिए समाज और गाँव वालों से लड़ना भी पड़े । मैं एक अच्छे पिता का फर्ज निभाते हुए मेरी बेटी की बेरंग दुनियाँ को रंगीन करूंगा । ऐसा सोचते हुए जाकर कमली को बोला अरे बेटा तुझे माँ नहीं मैं ले जाऊंगा मेले । और रंगीन चूड़ियाँ और कपड़े दोनो दिलवाऊंगा। और कल से तू घर का काम नहीं करेगी बल्कि स्कूल जाएगी और पढ लिख कर अपना खूब नाम कमाएगी ।
ऐसा कहकर मेले ले जाने लगा तभी पास में बैठी बूढ़ी काकी बोली तेरी तो मति मारी गयी श्यामू जो तू ये कर रहा हैं । श्यामू बोला काकी जिसको जो करना है करो मेरी कमली अन्य बच्चीयों की तरह ही रहेगी और वक़्त आने पर उसका दूसरा विवाह भी करूंगा । ऐसा कहकर वो वहाँ से चला गया । और बेटी के लिए मेले से खूब सारी चूड़ियाँ व कपड़े लाया । साथ ही कुछ किताबें और कॉपियां लाकर उसका स्कूल में दाखिला करवाया । कुछ दिन बाद कमली जब स्कूल गई तो उसके चेहरे पर एक नई मुस्कान और अपने पिता के प्रति मन मे अपार स्नेह था । श्यामू के इस फैसले से स्कूल की प्रधानाचार्या ने खुश होकर गांव के सरपंच से मिलकर श्यामू को एक
“जागरूक पिता “का सम्मान पितृ दिवस पर दिलवाया । अब कमली की मुस्कान के साथ श्यामू के परिवार की खुशियां फिर से लौट आयी ।

सरिता तिवाड़ी (पारीक)

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes:

<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?