सरिता तिवाडी (विधा : लघु कथा) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

सरिता तिवाडी (विधा : लघु कथा) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

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सरिता तिवाडी (पारीक)

सुलक्षणा ….जैसे नाम वैसे गुण ।
अपने पिता की इकलौती सन्तान ,जब उसके लिए उच्च शिक्षित परिवार से रिश्ता आया तो माँ बाप ने उसकी ईच्छा को जानकर रिश्ता तय कर दिया । सुलक्षणा को भी खुशी थी क्योंकि उसके भावी जीवनसाथी ने उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी ली और कहा वो हर तरह से तुम्हे सहयोग करेंगे । अब विदाई की बेला आ गई एक तरफ बाबुल का घर छोड़ने का गम तो पिया मिलन की खुशी भी । शादी के कुछ महिने आराम से निकले वो BEd कर रही थी । तभी अचानक दुःखो का पहाड़ उस पर गिर पड़ा !
उसके मम्मी पापा की दुर्घटना में मौत हो गई ।
उस वक़्त राजीव (उसके पति) ने पूरा सम्बल दिया और उसे इस सदमे से बाहर लाये । अब वो पूरी तरह समझ चुकी थी कि राजीव बहुत अच्छे हैं जिंदगी के हर उतार चढ़ाव में साथ देने वाले ।सुलक्षणा की शिक्षिका के पद नौकरी लग गई दोनो की जिंदगी हंसी ख़ुशी गुजर रही थी । पूरा सयुंक्त परिवार था उनका । पर नियति को कुछ और ही मंजूर था । उसके पति की ह्रदयघात से मौत हो गई । अब तो उसकी जिंदगी रुक सी गई । अपनी 6 माह की नन्ही बच्ची को देखती ओर सोचती कैसे चलेगी अब जिंदगी । पर सरकारी नौकरी की वजह से वो ज्यादा छुट्टियां नही ले पाई और उसने अपनी जिंदगी को रफ्तार दी ….। अपने सौम्य स्वभाव के कारण स्कूल में भी सबके साथ उसकी अच्छी बनती। अब तो उसने अपनी जिंदगी का मकसद सिर्फ अपनी बेटी की अच्छी और सही परवरिश बना लिया ।
पर कहते हैं कुछ लोगो की जिंदगी, जिंदगी नही एक जंग होती हैं एक के बाद एक लड़ाई लड़नी पड़ती हैं शायद उन लोगो मे सुलक्षणा का नाम शामिल था । पति की मौत के बाद खुद को बेटी के लिए सम्भाला पर इस बार तो वो बहुत कमजोर और टूटी हुई महसूस करने लगी खुद को ! जब उसे पता चला कि उसे स्तन कैंसर है । डॉ ने ऑपरेशन की सलाह दी ….पर किसके भरोसे ये कदम उठाती ? अपनी मासूम बच्ची को छोड़कर , पर फैसला लेना भी जरूरी था । अपनी एक सहेली के सहयोग से उसने हार नही मानी और मौत को मात देकर स्वस्थ हुई।अब वो जी रही थी तो सिर्फ अपनी बच्ची के लिये । अब इतने उतार चढ़ाव भरी जिंदगी जीने के बाद उसने एक फैसला लिया कि जिंदगी तो चलती रहती हैं कभी ख़ुशी के लम्हे तो कभी गम के साये ! पर अब वो उन बहनों के प्रेरणा बनेगी जो जिंदगी की जंग को हार जाती हैं और खुद को कमजोर मानती हैं । उसने हर तरह से पीड़ित दुखी बहनों के लिए आश्रम खोला और जिंदगी में आने वाली समस्याओं से कैसे सामना किया जाए उनको प्रेरित करती और कहती जिंदगी हैं ये तो चलती रहेगी पर तुम इसके आगे घुटने मत टेको इसका सामना करो । उसके इस प्रयास से उसने कई बहनों को अंधेरी जिंदगी में रोशनी की किरण दिखाई ! अब सुलक्षणा सुकून भरी जिंदगी हंसते हुए जी रही थी ।

सरिता तिवाडी (पारीक)

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