शशि कांत श्रीवास्तव ( जलती वसुंधरा प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र )

शशि कांत श्रीवास्तव ( जलती वसुंधरा प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र )

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शशि कांत श्रीवास्तव

देखो देखो…..
कैसे जल रही है -धरती
और जल रहा –आकाश
हो गया लाल -सारा जहां
जल रहे हैं जीव-जन्तु धरा पर
देखो देखो….
कट रहें है पेड़ हरे-हरे
और -उजड़ रहे हैं – बन
रही हैं अट्टालिकाएं वहां
देखो देखो….
कैसे सूख रही है -धरती
बिन पानी के-और हवा भी
आओ -चलें -रोकें…
कटने से हरे-हरे पेड़ों को
और उजड़ने से वन को
तभी बचेंगे..
धरती जल और आकाश |

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