रोहन कोठारी। (विधा : कविता) (आकाशगंगा | प्रशंसा पत्र)

रोहन कोठारी। (विधा : कविता) (आकाशगंगा | प्रशंसा पत्र)

156
(No Ratings Yet)
image

रोहन कोठारी

अनंत ब्रह्माण्ड का स्वरूप दिखाती,
विशाल आकाशगंगा,
नित नयी घटनाएं और रहस्य समेटे,
कल्पनातीत है आकाशगंगा।

स्वप्रकाशित तारें है इसमें,
विशाल ग्रह-उपग्रह है,
कितने उल्कापिंड समाहित है,
और अगणित धूमकेतु है।

सूर्य चंद्रमा ग्रह नक्षत्र,
विराट ईश्वर की रचनाएँ है,
ये लीला है उस अखंड मंडलाकार की,
जिससे आकाशगंगा बनी है।

असीमित होकर भी,
आकाशगंगा बंधी है सृष्टि के नियमों से,
+जो भी घटनाएं घटती है आकाश में,
पृथ्वी पर जीवन उसी का प्रतिबिंब है।

वेद-उपनिषद,खगोल, ज्योतिष का ज्ञान,
मिला है आकाशगंगा की घटनाओं से,
प्राणीमात्र का अस्तित्व निर्भर है,
आकाशगंगा की अदभूत गतियों से।

आओ करे अध्ययन,
आकाशगंगा की गहराइयों का,
कल्पना चावला को आदर्श बनाकर,
अनुसंधान को आगे बढ़ाये।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes:

<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?