रजिन्दर कोर। (विधा : गज़ल) (दर्द की दास्तान | सम्मान पत्र)

रजिन्दर कोर। (विधा : गज़ल) (दर्द की दास्तान | सम्मान पत्र)

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रजिन्दर कोर

यूँ जमाने को कभी दिखता नहीं ,
वो छुपा सा आइना दिखता नहीं ।

रात दिन ये सोचता होगा कहीं ,
दर्द ये मेरा कभी सोता नहीं ।

आपने जब बोलते रहते सभी ,
दुश्मनों का तीर तो चुकता नहीं ।

है जमाना यूँ ज़रा छोटा सही ,
फासला देखों कभी घटता नहीँ ।

दूर से ही देख लेता हूँ तुझे ,
यूँ खुदा तो राह में मिलता नहीँ ।

 

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