रजनी सरदाना । (विधा : कविता) (काल करे सो आज कर, आज करे सो अब | प्रशंसा पत्र)

रजनी सरदाना । (विधा : कविता) (काल करे सो आज कर, आज करे सो अब | प्रशंसा पत्र)

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रजनी सरदाना

रे मन मनचले,खुशियाँ बटोर लें,कल का नहीं कोई भरोसा, मिले ना मिले तुझे कहीं,ये बारिश का बोसा

उड़ान भर पंछियों सी
ना पल का कर इंतज़ार
आज की उड़ान तेरी,लें जाये कहीं तुझे तेरे सपनों के क्षितिज के पार

प्यार को अपना लें,जो पास हैं उन्हें गले से लगा लें,कल का नहीं एतबार निश्चित नहीं मौत के दिन- वार, आये वो कहीं साथ तुझे अपने लें चले

जो करना है वो आज कर,ना वक़्त ये बेकार कर,रूकती नहीं ये घड़ियां टूट जाती है कई कड़िया, ना कल का तू इंतज़ार कर बस आज पर विचार कर

कहीं मन रहे सोचता, खुद को कचोटता
काश! मैं रुका ना होता
काश! ये कर लिया होता
वक़्त ये फिसल गया, हाथ से निकल गया

तो जिंदादिली से जीवन गुज़ार, जिंदगी के दिन चार, कुछ ऐसे काम कर
अपनी जिंदगी, जिंदगियों के नाम कर
फिर होगा आज भी तेरा
नाम लेगा जमाना कल भी तेरा

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