योगेश व्यास ( चक्का जाम प्रतियोगिता)

योगेश व्यास ( चक्का जाम प्रतियोगिता)

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योगेश व्यास

भोलू आज बहुत खुश था, ओर खुस हो भी क्यों ना, पूरे एक साल बाद मुम्बई से कानपुर जो लोट रहा था,,,,

कुछ समय पहले की ही बात लगती है, छोटा सा खुशहाल परिवार था भोलू का, माँ, पिताजी, एक बहन ओर भोलू, सब कुछ अच्छा चल रहा था, पर अचानक जैसे कोई बुरी नजर लग गई हो इस परिवार की खुशियों को, जो घर मे सबसे छोटा हुवा करता था, पिताजी की बीमारी ने उस भोलू को घर का सबसे बड़ा बना दिया था, मजबूरियां इन्सान से क्या क्या नहीं करवा देती, पढ़ने लिखने की उम्र में सब छोड़ कर उसे अपने मामा के पास कमाने भेज दिया गया, लकवे की बीमारी के कारण पिताजी बिस्तर में आ चुके थे, डॉक्टर ने जो इलाज बताया वो काफी महँगा था, इलाज के पेशों के लिए ही माँ ने उसे उस के मामा के कहने पर बड़ी मुश्किल से खुद से दूर भेजा था,

आज एक बार फिर वही पूरी कहानी आज भोलू की आंखों के सामने घूम कर रह गई थी की किस तरह उसे पिताजी की बीमारी के चलते परिवार से दूर होना पड़ा था,

आज भोलू बहुत दिन बाद घर लौट रहा था, माँ के लिए साड़ी, बहन का सूट, पिताजी का कुर्ता बहुत कुछ लाया था सब के लिए, जैसे ही घर पहुंचा जो बहन दरवाजे पर ही राह देख रही थी चिल्लाई, माँ माँ भैया आ गये, आवाज सुनकर माँ दरवाजे तक नंगे पांव दौड़ी चली आई, आँखे भर आईं थी, जिस बेटे को आंखों से दूर ना होने देने वाली माँ को अपने जिगर के टुकड़े को आँखों से दूर जो करना पड़ा था, सब दर्द भूल कर आज माँ लिपट गई थी भोलू से, भोलू भी बहुत खुश था फिर से खुद को परिवार के बीच देख कर,

लेकिन तकदीर को शायद कुछ और ही मंजूर था, अचानक रात को पिताजी की तबियत बिगड़ गई, माँ की चीख सुनकर भोलू नींद से जाग चुका था, पास जाकर देखा तो पिताजी जमीन पर अचेत पड़े थे, सांसे चल रही थी, माँ को सब कुछ ठीक होगा ये सांत्वना देकर, पिता जी को गोद मे उठा कर पास ही के ऑटो स्टैंड की ओर भागा,

कुछ ही देर में ऑटो मुख्य सड़क पर सरपट दौड़ रहा था, लेकिन ये क्या, सड़क जाम, भोलू ने ऑटो ड्राइवर को अन्य रास्ते से चलने को कहा , ड्राइवर ने ऑटो घुमाया ओर सरपट दूसरे रास्ते पर ऑटो दौड़ाने लगा, दूसरा रास्ता अधिक लम्बा होने के कारण अस्पताल पहुंचने में काफी देर हो चुकी थी, पिताजी ने रास्ते मे ही दम तोड़ दिया, डॉक्टर ने गहन जांच के बाद, आपने आने में काफी देर करदी ये कहकर, पिताजी को मृत घोषित कर दिया, अब भोलू उस असमय लगे ट्रैफिक जाम को कोस रहा था, की काश ट्रैफिक जाम ना होता, तो शायद पिताजी को बचाया जा सकता था, लेकिन आज भोलू की सारी उम्मीदे टूट चुकी थी, जिस पिता के इलाज के लिए भोलू छोटे से बड़ा हो गया था, उस पिता का साया उसके सर से उठ चुका था, उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे संभालेगा अपनी माँ को, जिसने पिता जी का इलाज करवाने की खातिर पुत्र प्रेम का बलिदान कर दिया, आज भोलू बड़ा होकर भी खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा था।

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