भार्गवी रविन्द्र । (विधा : कविता) (मेरा देश मेरा अभिमान | सम्मान पत्र)

भार्गवी रविन्द्र । (विधा : कविता) (मेरा देश मेरा अभिमान | सम्मान पत्र)

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भार्गवी रविन्द्र

शस्य श्यामल धरा नीचे,ऊपर लहराता नीला आसमान
तीन रंगों की भव्य छटा निराली,तीन रंगों की अनूठी शान
रश्मिपुंज चरण पखारे ,करोड़ कंठ से उद्धृत यशो -गान
मेरा गौरव -मेरा भारत ……….मेरा देश -मेरा अभिमान।

विविध जाति,विविध धर्म,विविध भाषा,विविध परिधान
विविधता में एकता ,एकता में अनेकता , इसकी पहचान
राम गौतम की तपो भूमि,पूर्वजों की धरोहर, हमारा मान
मेरा गौरव- मेरा भारत ………..मेरा देश -मेरा अभिमान ।

निर्मल नीर सी बहती प्रेम सुधा,जन जीवन करता रस पान
हम एक हैं, एक रहेंगे , अखंड भारत का गूँजता गौरव गान
सुनीति, सुधर्म , सुविचार ,सुभाषित संयुक्त हमारा विधान
मेरा गौरव -मेरा भारत …………..मेरा देश -मेरा अभिमान ।

गुरुदेव बापू की जन्मस्थली ये ,सत्य अहिंसा का उद्गम स्थान
वंदे मातरम् हमारा राष्ट्र गीत , जन गण मन हमारा राष्ट्र गान
विश्व बंधुत्व ,वसुधैव कुटुम्बकम, अतिथि देवतुल्य पहचान
मेरा गौरव -मेरा भारत……………..मेरा देश -मेरा अभिमान ।

शून्य है भारत की वो देन है जिससे विश्व नाप सका आसमान
यहाँ ज़िंदगी रिश्तों में मुस्कुराती धड़कता दिल में संपूर्ण जहान
प्रेम सर्वोपरि धर्म यहाँ , करें सुंदर स्वस्थ भारत का नव निर्माण
मेरा गौरव -मेरा भारत……………..मेरा देश -मेरा अभिमान ।

संपन्न,समृद्ध जीवन यहाँ ,ये धरती माँ हमारी हम इसकी संतान
नदी,पेड़,पहाड़ों के विविध रंगों में हमारी संस्कृति,हमारी पहचान
ये हरी भरी वसुंधरा ,ये भव्य ताजमहल ,मेरा भारत सबसे महान
मेरा गौरव -मेरा भारत……………..मेरा देश -मेरा अभिमान ।
मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित(C) भार्गवी रविन्द्र.

 

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