प्रवीण गोला(विधा : कविता) (फूल खिले हैं गुलशन गुलशन | प्रशंसा पत्र)

प्रवीण गोला(विधा : कविता) (फूल खिले हैं गुलशन गुलशन | प्रशंसा पत्र)

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प्रवीण गोला

फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन ,
जग में छाया बसंत का उपवन ,
पेड़ों पर छाई हरियाली ,
कूके कोयल हो मतवाली ,
रँग – बिरंगे पंछी आते ,
नभ को और रंगीन बनाते ,
खुशियों से सबके खिलते मन ,
फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन |

फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन ,
चारों ओर भँवरों का गुंजन ,
नभ में छाये काले बादल ,
नाचे मोर , पपीहा और दादर ,
खेतों में सरसों लहराती ,
पीले फूलों से बगिया खिल जाती ,
नाचे , गायें खिलके हर्षित तन ,
फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन |

फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन ,
प्रणय निवेदन का हुआ आगमन ,
नए रिश्ते जुड़े फिर बजी शहनाई ,
बारातियों के संग बारात आई ,
मीठे पकवानों के ढेरों थाल सजे ,
फूलों के हार गलों में पड़े ,
सुख – शांति से सब हो सम्पन्न ,
फूल खिले हैं गुलशन – गुलशन ||

© प्रवीण गोला

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