प्रमोद मूंधड़ा ( उत्सव प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र )

प्रमोद मूंधड़ा ( उत्सव प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र )

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प्रमोद मूंधड़ा

प्रिय  आत्मन ~ 

आओ .. इस दीवाली पर  ~ प्रिय ऐसा कोई दीप जलायें  ~ 

दीपक ~  प्रतीक है प्रकाश का .. आलोक का । 

ज्योति ~  प्रतीक है उर्ध्वगामी  आत्मा का । 

 

सभी धर्मों ने विशेष प्रतीकों और त्यौहारों को निर्मित किया है ~ मानव 

जीवन को आनंदित और आलोकित करने की दिशा में सही मार्गदर्शन 

के हेतु !  हमारे हिंदू धर्म में दीपावली का त्यौहार विशेष महत्वपूर्ण है ! 

ये प्रतीक है  ~ अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा का !

 

पर बदलते समय के साथ .. ये त्यौहार सार्थक कम और औपचारिक 

ज्यादा बन गया है  ~ क्या आपको भी ऐसा नहीं लगता ? हम सभी 

दीपावली के त्यौहार पर घरों की साफ सफाई ,रंग रोगन करवा लेते 

हैं , घरों को सजा लेते हैं , मिठाई तोहफे बँटवा लेते हैं , आतिशबाजी 

भी हो जाती है , बहुत से दीपक जला लेते हैं  ~ और हमारी दीपावली 

पूरी हो जाती है ! हर साल दीपावली का त्यौहार आकर चला जाता है 

और हम वैसे के वैसे ही बने रहते हैं ! 

 

क्या सच में  ~ अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा हो पाती है .. ? 

मनुष्य के मन में .. जो अहंकार , घृणा , लालच , क्रोध , वैमनस्य का 

तमस है  ~ अंधेरा है  ~ क्या वो मिट पाता है .. या कम हो पाता है .. ?

 

शायद नहीं  ~ या ये कहना ज्यादा उपयुक्त होगा .. कि निश्चित ही नहीं ! 

कहीं हमारी यात्रा प्रकाश से अंधकार की ओर तो नहीं हो रही है .. जिसका 

प्रमाण है  ~ निरंतर और अधिक अशांत और तनावपूर्ण होता जा रहा 

मनुष्य का मन और जीवन ?  क्या आपको ऐसा नहीं लगता .. कि निरंतर 

बढते सुख के साधनों के बावजूद  ~ मनुष्य के जीवन से सहज आनंद 

और नैसर्गिक स्वास्थ्य कम होता जा रहा है  ?  

 

दीपावली के पर्व पर सभी लोग दीपक तो बहुत जलाते हैं .. पर शायद 

गौर से कभी भी दीपक को देखते ही नहीं !  दीपक की ज्योति में .. जो 

परम संदेश छुपा है .. उसे कभी समझने का प्रयास करते ही नहीं ! सब 

ओर से मन को हटाकर .. थोड़ी देर दीपक की ज्योति को ध्यान से देखें 

और कल्पना करें  ~ कि ऐसे ही हमारे भीतर नाभि के पास .. हमारी 

अपनी आत्मा की ज्योति भी इसी तरह प्रकाशित हो रही है .. और 

ऊपर की ओर बढ रही है !  कुछ दिनों के सच्चे प्रयास से ही आप चकित 

हो जायेंगे .. और पायेंगे कि आपके भीतर भी कुछ आलोकित होने लगा ! 

ये अंतस की  ~ आत्मा की ~  निर्धूम ज्योति ही .. भीतर के .. मन के 

अंधकार को मिटाने में सहयोगी हो सकती है ! और सच में ~ अंधकार से 

प्रकाश की ओर यात्रा हो ~ तो दीपावली सही मायने में सार्थक हो सकती 

है ! आप सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें  ~ ~ 

 

इस दीवाली पर जरा सोचें और संकल्प करें .. कि ~ 

 

 घर आंगन.. उजियारा है तो.. 

    मन आंगन.. अंधियारा क्यूँ हो 

  जीवन सारा.. बने महोत्सव..  

  एक दिवस ही.. उत्सव क्यूं हो..!!

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