नितिन राठौर (UBI सावन की पुकार प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र)

नितिन राठौर (UBI सावन की पुकार प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र)

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नितिन राठौर

आज मौसम था सुहाना,बारिश भी कुछ जुदा थी 

तेरी कातिल जवानी, कमसिन हर अदा थी|| 

 

उधर बरसता रहा सावन,इधर बरसता तेरा यौवन 

तुझे छूने की मेरी हसरत, भीग रही सदा थी|| 

 

 इशारे, वो इरादे, (फिर)..आँखें झुकाकर हँस देना  

मेरी नज़र में.. मेरी नज़र में तेरी, हर एक अदा थी||

 

गुलाबी गाल, घने बाल, सुर्ख होठों पे शबाब 

इस रूप पर मेरी, हर हसरत फ़िदा थी||

 

सखियों से चुपके, देखना,फिर बहाने बनाना 

‘ *साहिब* ‘  तेरे यार की, क्या खूब अदा थी|| 

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