नरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव ( चक्का जाम प्रतियोगिता)

नरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव ( चक्का जाम प्रतियोगिता)

640
(No Ratings Yet)
image

नरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव

हो हल्ला कोहराम मचा है
फिर घंटों से जाम लगा है ।

नाजायज कब्जे हैं जारी
आहत जनता है बेचारी ।

तिल भर रखने जगह नहीं है
रोज जाम की वजह नहीं है ।

जलसे और तमाशे होंगे
नित नए झंडे नारे होंगे ।

या फिर पुलिया टूटी होगी
नेताजी की रैली होगी ।ः

जाम रोज का किस्सा है
हर दिल मे एक गुस्सा है ।

बांध सब्र का टूट रहा है
सारा सिस्टम लूट रहा है ।

भेंट, कमीशन, हिस्सेदारी
सब कानूनों पर है भारी ।

जिसको इसमे अर्थ (?) दिखेगा
तब ही कोई हल निकलेगा ।

जिसके खीसे मे दम होगा
उसका ही तो बिल निकलेगा ।

सबको अपने से मतलब है,
बाकी सरोकार नहीं है,

जनता से लेकर शासन तक,
कोई जिम्मेदार नहीं है ।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes:

<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?