डॉ सोनिया गुप्ता। (विधा : गीत) (काला धब्बा | सम्मान पत्र)

डॉ सोनिया गुप्ता। (विधा : गीत) (काला धब्बा | सम्मान पत्र)

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डॉ सोनिया गुप्ता

अजब काला ये धब्बा है, हँसाता है, रुलाता है ,
कभी लगता बड़ा सुंदर, कभी लेकिन न भाता है !

कभी रुक्सार का वो तिल, किसी गोरी का देखे जो ,
जमाले हुस्न में डूबा सभी दुनिया को भूले वो,
लगे काला मगर रंगीन सा जादू दिखाता है !
अजब काला……..

नयन काजल के काले दाग भी लगते बड़े प्यारे,
बढ़ाते नूर चेहरे का, भले दिखने में हों काले,
बुरी नज़रों से दुनिया की सभी को ये बचाता है !
अजब काला……..

उमड़ कर मेघ जो काले चले आते हैं सावन में,
लगें सबको बड़े सुंदर, उमंगें वो भरें मन में,
हरिक दिल झूम कर फिर प्यार के ही गीत गाता है !
अजब काला……..

मगर जब दाग इक काला किसी अस्तित्व पर लगता,
दहक जाता है मन भीतर, तड़पता हर घड़ी रहता,
बड़ा नीरस लगे जीवन, नरक सा बन ये जाता है !
अजब काला……..

कहें सब चाँद को सुंदर, कहीं कोई नहीं उस सा,
मगर दागिल हुआ ये भी, गृहण जब भी इसे लगता,
है होता दर्द उसको भी, नहीं चाहे बताता है !
अजब काला……..

अनेकों रूप हैं इस दाग के, समझो कभी इनको,
हरिक का है महत्त अपना, न अनदेखा करो इनको,
सभी रूपों में ये धब्बा, सबक हमको सिखाता है !
अजब काला……..

****
डॉ सोनिया !

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