एकता श्वेत गोस्वामी । (विधा : लघुकथा) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)

एकता श्वेत गोस्वामी । (विधा : लघुकथा) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)

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एकता श्वेत गोस्वामी

वाह पापा वाह
रिचा सुंदर सुशील उपाध्याय जी की इकलौती पुत्री इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा में थी।
रिचा के पिताजी उपाध्याय जी भी अपनी जिम्मेदारी सरकारी सेवानिवृत्ति से पहले पूरी कर देना चाहते थे। अतः वह उसके लिए अच्छे लड़के की तलाश में थे।
उपाध्याय जी के ऑफिस में विपुल नाम का लड़का सरकारी पद पर नई नियुक्ति में आया 27 साल का नवयुवक ,लंबी कद काठी शालीन चेहरा ,कार्य के प्रति निष्ठा ,यह देख कर उपाध्याय जी के मन में रिचा के लिए विपुल अच्छा लड़का लगा । 2-3महीनों तक विपुल के बारे में सभी बात पता करके विपुल को चाय के लिए घर में आमंत्रित किया गया इसी बहाने श्रीमती जी व रिचा ने भी लड़के को देख लिया।
विपुल को भी रिचा पसंद आ गई और उन्होंने अपने परिवार से बात करने के लिए उपाध्याय जी को कहा।
विपुल के पिताजी व माताजी रिचा को देखने आए। उपाध्याय जी ने भी उनकी खूब आवभगत करी फिर वह वहां से चले गए हैं उपाध्याय जी ने जब फोन किया तब उन्होंने उन्होंने कहा कि अभी तो शुरुआत है अभी तो विपुल सरकारी नौकरी लगी है अब तो उसके रिश्तो की लाइन लगेगी आप भी इस लाइन में पहले उम्मीदवार हैं हम आपको फिर सोच समझ कर जवाब दे देंगे। और फिर आपकी लड़की है मेरे लड़के की हाइट में भी अंतर है तो जोड़ी नहीं जंचेगी।
उपाध्याय जी ने बिना कोई उत्तर दें फोन रख दिया वह उनका जवाब समझ गए। समय बीत गया 6 दिन बाद रिचा का रिजल्ट आया और वह है एडमिनिस्ट्रेशन के सरकारी पद पर अच्छे स्थान पर नियुक्त हो गई।
जैसी ही यह खबर विपुल के परिवार को मिली तब विपुल के पिताजी ने फोन किया हमें रिश्ता मंजूर है और हम जल्द से जल्द आपकी पुत्री से विपुल का विवाह करना चाहते हैं।
उपाध्याय जी ने रीचा की तरफ देखा और उसको हंसता मुस्कुराता देख विश्वसनीय अंदाज से विपुल के पिताजी को जवाब दिया । आपके पुत्र के लिए रिश्तो की लाइन लगी हुई है और मैं सबसे पहला प्रतिनिधि हूं इसलिए आप यह दया मुझ पर ना करें अन्य लोगों को भी इसका मौका मिलना चाहिए । और फिर मेरी बेटी अफसर और आपका बेटा सरकारी क्लर्क यह जोड़ी भी नहीं जच पाईगी और उन्होंने फोन रख दिया।और रीचा ने जोर से झूमते मुस्कुराते कहा वाह पापा वाह।
स्वरचित व मौलिक
एकता श्वेत गोस्वामी

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