अश्विनी राय (UBI अक्षय प्रतियोगिता | सम्मान पत्र)

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शीर्षक – अक्षय तृतीय

पुराणों की लिखी मैं सुनाता हूँ
युगादि की गड़ना मैं गाता हूँ

सतयुग का प्रारंभ हुआ
त्रेता का भी आरंभ हुआ

हुआ अचंभा विष्णु के निज धाम
नर-नारायण हयग्रीव और परशुराम

माँ गंगे का अवतरण
हुआ धरा पर आज ही
माँ अन्नपूर्णा भी आईं
अपनी धरा पर आज ही

श्री कृष्ण सुदामा भी मिले
संदीपन आश्रम में आज ही
ब्रह्मपुत्र अक्षय कुमार का
अवतरण हुआ था आज ही

द्रौपदी चीरहरण कलन्का
हुआ इसी दिन काल
जय बोलो श्री भगवान की
लिया जिन्होंने उसे सम्हाल

खत्म हुआ महाभारत युद्ध
आज ही मिटा हृदय का क्रुध्द

ऐसा सिद्ध दिवस है
अक्षय तृतीया विशेष
शुभ मंगल कार्य का
करो तुम श्री गणेश

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