अनामिका जोशी। (विधा :लघुकथा) (एक दुल्हन के सपने | सम्मान पत्र)

अनामिका जोशी। (विधा :लघुकथा) (एक दुल्हन के सपने | सम्मान पत्र)

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अनामिका जोशी

माँ!! क्यों प्रिया के साथ जबरदस्ती मेरी भी शादी करने पर तुली हो ! मुझे पढ़ने दो,, अगर नौकरी लग गई तो अपने आप अच्छे रिश्ते आएंगे !!
समझाकर बेटी! तेरी तीन बहने और है ।सबका अलग-अलग ब्याह इतनी महंगाई के जमाने में ,,,,,,,,,,,,
कहते-कहते माँ की आंखें भर आई,,,,,,,,,
रुचि आगे कुछ ना बोल पाई ।परिस्थितियों के आगे उसे अपना मन मारना ही पड़ा ।लोगों से सुना था रोहन तो ‘श्रवण कुमार’ है ।इसका मतलब वह अच्छी तरह से जानती थी ।
शादी की रात रोहन रूचि के पास आए और कहा- “देखो रुचि !! मैंने आज दिन तक कभी अपने माता-पिता की आज्ञा या इच्छा का उल्लंघन नहीं किया है ।”
मुझे तुमसे भी पूरी उम्मीद है कि तुम भी कभी ऐसी परिस्थिति नहीं बनने दोगी !
रुचि ने मन ही मन सोचा – बेटा रुचि! अब तो भूल जा पढ़ाई-वढ़ाई और संभाल ले चूल्हा-चौका और घर !!
अरे ! क्या सोच रही हो ?
जी,,,वो,,,,,,,,,,,
रूचि की बात काटते हुए रोहन ने कहा – लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि किसी और की बेटी को मैं अपने घर लाकर उसके सपनों,, उसके हुनर और उसके भविष्य से खिलवाड़ करूँ,,,,,, क्योंकि अब तुम्हारे भविष्य से हम सब का भविष्य भी जुड़ा है,,,,,, तो,,,! तुम अपनी पढ़ाई के लिए आजाद हो । उसमें कभी कोई खलल नहीं डालेगा ,,,,यह मेरा तुमसे वादा है।
लेकिन घर में किसी को एतराज हुआ तो,,,,,,?
अरे,!! तुम्हें पता नहीं !!
श्रवन कुमार के साथ-साथ लोग मुझे ‘बाहुबली’ भी कहते हैं!!
यह सुनकर दोनों खिलखिला कर हंस पड़े और प्रीति शरमाते हुए रोहन के गले लग गई। उसे अपने सपनों का राजकुमार जो मिल गया था !
(स्वरचित) अनामिका जोशी “आस्था”

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