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Poetry

……ओस……

रात भर सोखती है नमी…. जमती है भीगी-सी सुबह तक फिर धूप की बूंद पीकर , सारी पहर छुपती-छुपाती शाम ढलते ही ऑंखों के ऑंगन

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सीख

सीख चहकती फुदकती अपनी नन्ही चोंच में कुछ टूटी टहनियां और सूखे पत्ते लिये उमंग भरी उड़ान संग जा पहुँचि पेड़ पर अपना बसेरा बनाने

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Poetry

तुम्हें देखा है

खुद को बलिहारी करके धीर-धीरे नज़रों को उठा तुम्हें देखा है। अपनी हस्ती को नगण्य मान समस्त स्वरूपी तुम्हें देखा है। है धीमी अपनी चाल

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Poetry

तनाव

हर हृदय परेशां हैं, हर मन में तनाव और निराशा हैं, आखिर क्यों? क्या हम खोने-पाने की होड़ में ख़ुद को खो रहे हैं? हमारी

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बचपन का सफ़र

मासूम , कोमल , सरल, मीठा और सुहावना है ये सफ़र बचपन का। तुतलाते बोल , ठुमकती चाल , हर वक्त बस खिलौने के साथ खेलना ,

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Dosti

दोसती दोसती एक अटूट रिश्ता है एक प्यार भरा मीठा एहसास है जीवन में जो भर दे संगीत वह साज़ है और दामन को ख़ुशियों

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