माँ

माँ

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जीयाना जयसिंघानी

घंटो तक मेरी निगाहें तकती रही दूर कही ,
गीली आँखें थरथराते होठ बस आंसू ही आंसू थे वही,
हर सांस हर धड़कन हर एहसास बस यही दोहराती रही,
माँ….
माँ….
आजा थामले मेरी बाहें और ले चल मुझे अपने संग फिर वही,
जहाँ बस आपके पीछे छुप जाने से ही सारा डर गुम हो जाता था,
जहाँ बस आपकी एक मुस्कान से अँधेरे में भी उम्मीद का दीया जल जाता था,
जहाँ आपके आँचल में दुनिया का सारा सुकून मिल जाता था,
जहाँ बस आपके होने से ही सब कुछ ठीक हो जाता था…

माँ
मेरा पहला शब्द , मेरा पहला एहसास हो आप,
मेरा पहला स्पर्श, मेरा पहला कदम हो आप,
मेरा पहला ख्याल, मेरा पहला अक्षर हो आप,
मेरी पहली मुस्कान, मेरी पहली ख़ुशी हो आप,
कैसा है ये आपका प्यार अनोखा, कैसे है ये रिश्ता इतना गहरा,
के मेरी खामोशी में भी अलफ़ाज़ महसूस कर लेते हो आप..
इसीलिए तो ईश्वर का सबसे सुन्दर तोहफा, बस उन्ही का तो दूसरा रूप हो आप…

माँ
आपकी बहुत याद सताती है, वापस मेरे पास आ जाओ,
अब बहुत थक गयी हू यहाँ, मुझे सबसे दूर अपने आँचल में छुपा लो,
प्यार से अपनी गोद में सुलाकर, हाथ अपना मेरे बालो में फेरकर, फिर बचपन की लोरियां सुना दो,
नन्ही सी उँगलियों को थामकर, फिर आज गिरने से बचा दो….
बस एक बार सिर्फ एक बार,
फिर गले से लगा दो ना माँ…
फिर अपने अंदर समा लो ना माँ…

— जीयाना जयसिंघानी

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