मन की गुहार

मन की गुहार

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मन में ख़ुशी की लहर हो तो सब कुछ खिला-२ सा लगता है
नहीं तो ये गुलशन वीरान जंगल सा उजाड़ दिखता है

उठो,आँखें खोलो,देखो ! दिन कितना उजला…चमकीला है
रात गई ! समझो— बात गई— बीती बीत गई

जीवन ठहरता नहीं है ! चलता रहता है अनवरत…
पक्षियों के कलरव , चिड़ियों की चहचहाहट में
बच्चों की बतकही , उनकी खिलखिलाहट में
@reetetandonbadhwar

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