आँसू

आँसू

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आँसू

“मुस्कुराहट तो महबूबा है जो ख़ुशियों में साथ रह जाती है

एक आँसू है जो बीवी की तरह सुख दुःख दोनो में हाथ

थामती है”

इक अजीब सा रिश्ता है इंसान का आँसुओ से, दिल के जज़्बात जब छलकने को तरसते हैं, यह बहकर आँसू बन जाते हैं। लोगों ने खामखां आँसुओ को दर्द की तोहमत लगा दी है, सच तो यह है कि ख़ुशी के आँसू दिल को ज़्यादा सुकून देते हैं।

आज पूरी दुनिया Father’s day मना रही है, वैसे तो मैं यह मार्केटिंग की हथकंडो में नहीं फँसती, पर अपने माता पिता को याद करने का कोई बहाना मिले तो क्यों नहीं! इसी विचार के साथ अपने पिता के लिए एक कविता लिखने का प्रयास करने लगी। ऐसा क्या लिखती जो उन्हें दोबारा यक़ीन दिलाए कि मैं उनसे प्यार करती हूँ। क्या मुझे उन्हें यक़ीन दिलाने की ज़रूरत है? शायद नहीं, लेकिन प्रेम की अभिव्यक्ति किसे नहीं पसंद? और इसी भावना से प्रेरित होकर मैंने लिखना शुरू किया। कविता लिखने की पूरी प्रक्रिया में मेरा साथ दिया मेरे आँसुओ ने!

हर पंक्ति में मैं अपने जीवन का कुछ अंश डालने की कोशिश कर रही थी, और इस कोशिश में मुझे अपने हृदय से कुछ कही अनकही बातों को याद करना था। जब अनुभव मीठे याद आते तो अच्छे दिन की याद में आँसू बहते। और कुछ खट्टी बातें याद आती तो मन विचलित होकर रोने लगता कि बचपने में मैंने क्या कुछ किया!

यादों के पन्नो को झकझोरते हुए इन आँसुओ ने उस दोस्त सा साथ निभाया जो भले ही हमसे रोज़ ना बात करता हो, लेकिन जब कभी उससे मुलाक़ात होती है, जी हल्का हो जाता है!

ख़ैर, कविता पूरी करी और सबसे पहले पापा को फ़ोन पर विडीओ कॉल कर के सुनायी। कविता सुनते हुए अब वो रो रहे थे! जिस आदमी को आपने जीवन भर दृढ़ एवं संयमित देखा है, उसके आँखो में आँसुओ की अपेक्षा नहीं होती।

पुरुष को कभी रोना नहीं चाहिए, अपने आँसू नहीं दिखाने चाहिए! क्यों? इससे उनका मान कम हो सकता है! … कितना दोगला नियम बना लिया है हमने इस समाज में!

बहुत ही दुःख की बात है अगर हम ऐसा सोचते आए हैं तो! जो इंसान अपना दुःख दिखाने में इतना हिचकिचाएगा वो इंसान प्रेम भाव कैसे दिखा पाएगा? आँसू क्या सच में कमज़ोरी की निशानी होते हैं?!? पता नहीं, परंतु आज पापा के साथ थोड़े आँसू बहाकर ऐसा लगा हमारा रिश्ता थोड़ा और मजबूत हो गया! कल तक जिनको सिर्फ़ एक दाता के रूप में देखा, आज अचानक वो एक दोस्त सा जान पड़ रहा था! एक सुखद अनुभव था!

दिन बढ़ा और शाम को कुछ अजीब सा हुआ जिसने फिर से मुझे इसी बात पर सोचने मजबूर कर दिया कि मेरा मेरे आँसुओं से क्या रिश्ता है?

क्रिकेट मैच आरम्भ होते ही भारत का राष्ट्रगान बजा और मैं अपने पति और बच्ची के साथ उसके सम्मान में खड़ी हुई और हम सब राष्ट्रगान गाने लगे। जैसे ही “जय है” की गूँज उठी, मेरी आँखे भरने लगी, और जब तक तीसरी बार “जय है” गूँज हुई मैं रो रही थी! क्या मैं दुखी थी?!? बिलकुल नहीं!

यह एक अलग जज़्बा था शायद जिसे मैं तो क्या कोई भी भावुक व्यक्ति शब्दों में बयान नहीं कर सकता। एक अहसास जिसमें गर्व मिश्रित संतोष है! अपने जन्मभूमि के प्रति एक प्रेम जिसे शायद हम हर रोज़ नहीं व्यक्त करते परंतु जब मन भाव विभोर हो उठता है और शब्द हमारा साथ नहीं देते, तब यही आँसू हमारे कंधे पर हाथ रखते हैं और धीमे से कहते हैं, “मैं समझता हूँ।”

आज एक बात मैंने गाँठ बाँध ली, कि मेरे बात बात पर रोने की आदत कोई कमज़ोरी नहीं है। यह मेरे व्यक्तित्व का एक मुख्य अंग हैं जिससे मैंने दिल से दोस्ती कर ली है क्योंकि मुझे पता है, यह आँसू सुख दुःख हर पल में मेरे साथ रहते हैं!

तो अगली बार अगर आप अपना दिल हल्का करने के लिए दो आँसू बहाए तो क़तई शर्माये नहीं, बल्कि अपने भावनाओं की सफल अभिव्यक्ति के लिए अपने आप को प्रशंसित करे! क्योंकि मुस्कुराहट की सराहना तो हर कोई करता है, लेकिन आँसुओ का मोल समझकर उसका सत्कार करने वाला व्यक्ति एक समझदार और सामवेदनशील व्यक्ति होता है!

आपके पास अपने आँसुओ के अनुभव हो तो हमसे ज़रूर बाँटिये! धन्यवाद!

 

By Kalpana Swamy

12 Comments on “आँसू

  1. Well said Kalpana about tears. It is our true friend. The sayings go well balanced when we say ” A friend in need is a friend indeed” which only tears offer

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  2. सही कहा आँसुओ की अलग ही कीमत होती हैं वो खुशी में भी साथ देते हैं और गम में भी कई बार हम जो न कह पाते किसी से भी वो आँखों के जरिये बाहर निकाल देते हैं।

    बहुत अच्छा लिखा है डियर ऐसे ही लिखते रहना साधुवाद 😘

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  3. मुबारक हो मेरे आसूओ पे न जाना । यह गीत याद आ गया

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  4. कल्पू, बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार करें!

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