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शिवराज प्रधान (UBI सावन की पुकार प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र)

सावन की पुकार।

बिजली कड़के

आकाश गरजे

साथ,हवा बहके

घटायें तड़पे ।

 

रिमझिम सरगम

झंकृत तन मन

आंगन छमछम

मोहक नर्तन।

 

नदियां बेगवान

बाढोंकी उफान

आफतपे जान

न मिले त्राण।

 

खूदके  साथ

खिडकी के पास

यादोंके आलाप

गूंजे आसपास !

 

अरसों के बाद

श्रावण के साथ

भुली हूयी बात

आये यूं याद  !

 

कैसी तड़पन ? 

पीड़ा बन बन

रुलाये मन

युँ ढूंढे हमदम !

 

 

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