Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content

शाम्भवी (अँधेरा प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र )

अंधेरे मुझे देखने अब लगे है
अंधेरे मुझे घूरने अब लगे है
अंधेरे मुझे सोचने अब लगे है
अंधेरे मुझे अब डराने लगे है ,
अंधेरों को जिल्लत सहेजा है किसने
अंधेरों से लड़ने की हिम्मत नहीं है ।

नही दिख रही क्यूँ उजाले की रेखा
नही है उजाले में आशा की आशा
मगर सोचती हूँ कि कर लूं बगावत
दिलो से मिटे ये अंधेरे शायद ,
सुना है अंधेरों में इक रोशनी है
हौसले है बहुत ,
डर मुझे कुछ नही है

How useful was this post?

Click on a star to rate it!

Average rating 0 / 5. Vote count: 0

No votes so far! Be the first to rate this post.


Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes:

<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>



Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to

× How can I help you?