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रजनी सरदाना। (विधा : कविता) (हीरा है सदा के लिए | सम्मान पत्र)

हीरा है सदा के लिए, गर वो हीरा बन जाये तो
चमक उसकी फैले चहुँओर, जब वो तराशा जाये तो,
मोल आंके जौहरी, कहे अनमोल
पारखी नज़रों से अपनी जब ले तोल
रत्नों के ढेर में सर्वश्रेष्ठ, नायाब रत्न
टूटा ओर मैला हो तो बिके फिर पत्थर के मोल

यूँ ही हुनर इंसान का किसी हीरे से कम नहीं
छिनने ओर लुटने का भी कोई गम नहीं
अपनी कला से इंसान क्या ना कर जाये
माटी को सोना, पत्थर को हीरा बना लाये
इसलिए खुद को तराशो ऐसे, दुनियाँ में चकाचोंध हो
तुम्हारी रोशनी से कई घर रोशन हों
अंधकार वाले मन में उजियारा हों जाये
सूने,अँधियारे जीवन में प्रकाश फैल जाये
इंसान नहीं, “हीरा है हीरा”ऐसी मिसाल कायम हो
जन्म देने वाली माता भी पुलकित हो, गर्वित हो
कहे, रत्न ऐसा मेरी गोद में आया,
जिसने सदा के लिए हीरा बन,
मेरी कोख का नाम रोशन कर दिखाया

स्वरचित
रजनी सरदाना

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