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निशा टंडन। (विधा : लघुकथा) (विचारों की शक्ति | Gold pen award)

कहते हैं हमारी सोच में बहुत ताक़त होती है। जैसे ख़याल हमारे मन में आते है वैसा करने की हमें अंदर से दृढ़- शक्ति मिलती है और हमारे कठिन प्रयास से वो कार्य पूर्ण हो जाता है। जीवन में कई ऐसे पड़ाव आते हैं जो हमारे नियंत्रण से बाहर होते हैं। जितना भी हम उन्हें बदलने की कोशिश करें वो नामुमकिन होता है । और दूसरी तरफ़ हम अपने विचारों की शक्ति से असम्भव को भी सम्भव करने की क्षमता रखते है। मन एक बार जो ठान लेता है वो पूरा करके छोड़ता है। ये जज़्बा मैंने अपनी सत्रह साल की बेटी में देखा है। उसकी इच्छा-शक्ति बहुत तेज है।वो एक बार जिस चीज़ का मन बना लेती है फिर चाहे कितनी भी रुकावटें आएँ, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता और वो अपना मुक़ाम हासिल करके ही दम लेती है।

जन्म के समय अनुष्का एक “डाउन-सिंड्रोम” नामक बीमारी से ग्रस्त पाई गई। इसमें बच्चे की सीखने की और कोई भी काम करने की योग्यता किसी भी आम बच्चे से कम होती है। ज़िंदगी के रोज़मर्रा के काम भी वो मुस्तैदी से नहीं कर पाते। बोलने और चलने में भी उन्हें वक्त लगता है। पर अनुष्का इन सब मुश्किलों को पार करती गई और इन मानदंडों की अवहेलना करती गई। यही बात उसको आम से ख़ास बनाती है वो ना सिर्फ़ मेरे लिए बल्कि आसपास के कई लोगों के लिए प्रेरणा की स्त्रोत है।उसने इन सालों में ना सिर्फ़ तैरना सीखा, बल्कि घुड़सवारी का प्रशिक्षण भी ले रही है। अनुष्का फ़ैशन शो में भी भाग लेती है, नृत्य सीखती है और काफ़ी मायने में आत्मनिर्भर है। सिर्फ़ अपने मज़बूत विचारों और इरादों की वजह से।अगर कभी हमने कह दिया कि वो कोई काम नहीं कर पाएगी तो उसने हमेशा हमें ग़लत साबित किया। आसपास के लोग क्या सोचेंगे उसने कभी परवाह नहीं की। एक बार मन बना लिया तो फिर पीछे मुड़ने का नाम नहीं लिया। अपनी समझ-बूझ से वो हर परिस्थिति का सामना कर लेती है और हमने उसका हौंसला बढ़ाया है ताकि वो बहुत से फ़ैसले खुद ले सके। इसलिए वो कभी जल्दी कोई फ़ैसला नहीं लेती और बहुत सोच विचार के बाद निर्णय लेती है। हम अक्सर उससे सहमत होते हैं और कहीं कोई कमी या गलती है तो हम उसे समझाते है। अगली बार वो बहुत सोच कर फ़ैसला लेती है। इसलिए कहते हैं विचारों में बहुत शक्ति होती है। सही विचार सही दिशा में और ग़लत संगत और ग़लत विचार ग़लत दिशा में ले जाते हैं। विचार ही इंसान को परिपूर्ण बनाते हैं।

अनुष्का ६ साल की थी। हम गोवा छुट्टियाँ मानने गए थे। हमारे कुछ दोस्त और हमारा परिवार कुछ “अड्वेंचर-स्पोर्ट्स” करने गया। सबसे पहले हमने “रिवर राफ़्टिंग” करने का मन बनाया। हम सबका ये पहली बार था। हम बहुत डरे हुए थे और ये भी सोच रहे थे की अनुष्का बहुत छोटी है और पानी में नाव उछलेगी तो वो डर जाएगी। पर हम सबको जान कर बहुत गर्व हुआ कि जब हम नाव में डरे हुए बैठे थे और एक मोड़ पर हम नाव के अंदर छुप गए, अनुष्का पतवार पकड़ कर आराम से चला रही थी। उस वक्त वो बोलती नहीं थी पर जब हम बातें कर रहे थे तो उसको हमारी घबराहट समझ आ गयी और अपने दिमाग़ में उसने योजना बना ली थी। नाविक भी बहुत हैरान था और उसने अनुष्का की समझ बूझ की तारीफ़ की। ज़िंदगी के हर मुश्किल वक्त में वो काफ़ी सोच विचार करती है और अपनी कोशिश से सही फ़ैसला ले, काम को अंजाम देती है। हमें उसपर गर्व है।

दृढ़-निश्चय हमारे मनोबल को बढ़ाता है। मन में सकारात्मक विचार हर कार्य को आसान बना देते हैं। हमारे विचार ही हमारे जीवन का निर्माण करते हैं। वे हमारे जीवन की नीव हैं।

निशा टंडन

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