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डा. अपर्णा प्रधान। (विधा : गीत) (मेरा पहला प्यार | सम्मान पत्र)

आए मेरा पहला प्यार बन कर, खूबसूरत एहसास बन गए

उमंग भरी हसीं सौग़ात बन कर, तुम बहुत ख़ास बन गए

मोहब्बत का आग़ाज़ कर के, जीवन का श्रृंगार बन गए

खुशियों को दामन में भर कर, प्रेम भरा संसार बन गए

आए मेरा पहला प्यार बन कर…………

दिलकश ख़्याल बन कर, होंठों की मुस्कान बन गए

मीठा सा इकरार कर के , अनकहा सा एतबार बन गए

ख़ुशबू एहसासो में फैला कर, इश्क़ का केसर बन गए

सुकून देती आस बन कर, एक अटूट विश्वास बन गए

आए मेरा पहला प्यार बन कर……….

प्रेम रस की बरसात कर के, मृगतृष्णा सी प्यास बन गए

जज़्बातों का प्रवाह कर के, सुखद अनूठा बन्धन बन गए

जीवन का साज़ बन कर, रूह की मधुर आवाज़ बन गए

मोह की डोर से बंध कर, हमसफ़र हमनशी हमनवाँ बन गए

आए मेरा पहला प्यार बन कर……..

ख़ुशनुमा कायनात सजा कर, उम्मीदों का गुलशन बन गए

आँखों की शरारत बन कर, ख़ामोशी की ज़ुबान बन गए

दिल में हलचल मचा कर, दिल के सुनहरे अरमान बन गए

इबादत में माँगी दुआ बन कर, ख़ुशियों का जहान बन गए

आए मेरा पहला प्यार बन कर……….

डा. अपर्णा प्रधान

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4 Comments

  • 0

    Excellent. So well written.

    • 0

      Thanks Vinita

  • 0

    Simply superb, excellent

  • 0

    बहुत सुंदर गीत लिखा है!

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