Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages

अनामिका जोशी । (विधा : कहानी) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)

क्या ?? ….जीनत का पता चल गया??…..
क्या हुआ ?किस का फोन है?…….. जीनत की माँ अपने पति से पूछ रही थी।
पिता निढाल होकर गिर पड़े। बुढ़ापे में दोनों ही एक दूसरे का सहारा थे। कुछ बोलिए,,,,,,,, जीनत की मां अपने पति को झकझोरते हुए बोली !!
‘एक लाश की शिनाख्त करने पुलिस ने बुलाया है।’
नहीं,,,,,,,,,, नहीं ,,,,,,,,दोनों बिलख पड़े ।बड़ी बेटी कुछ ही मिनटों में ससुराल से आ गई ।
“देखिए,,,, शव बहुत ही क्षत-विक्षत है ।”
मन मजबूत रखें शायद आप देख ना पाएँ ।
नहीं,,नहीं,,,,,,,,, मेरी फूल सी बच्ची को किस ने कुचला है!!!! आज पिता को पहली बार इस तरह फफक-फफक कर रोते हुए देखा था ,तनिषा ने ।आह,,,!!!!,,,नहीं,,,,,,,,
चीत्कारें गूंज उठी ।पति और नंदोई का नाम सामने आया है।
दिल पर पत्थर रखकर ‘अवशेषों’ का अंतिम संस्कार किया गया ।अपने पिता को इतना गुमसुम और पथराया हुआ कभी नहीं देखा था तनिषा ने। एक और वज्रपात हुआ।!! पता चला आज फिर रिश्वत की जीत हुई ।
दामाद बनावटी आंसू लेकर सफाई पेश करने आया।
माता कालरात्रि बनकर कर उसके दो टुकड़े कर देना चाहती थी,पर पिता उसे अपने साथ ऊपर कमरे में ले गए।
यह देखकर मां और बेटी क्रोध और आश्चर्य से जड़ हो गई ।
कुछ ही देर में पिताजी हाथ में खून से सना हुआ हथौड़ा लेकर नीचे आए और बोले-” मैंने उसका वही हाल किया है जो उसने मेरी बेटी का किया था”।
थोड़ी ही देर में पुलिस आई ।पिता ने कहा- इन्हें मैंने ही बुलाया है ।
और सभी के सामने एलान किया मैं जानता हूँ, अनगिनत पैसा लगाकर भी मैं अपनी बेटी को न्याय नहीं दिला पाता। बेटी !! अपनी मां का ख्याल रखना । पुलिस के साथ जाते हुए अपने पिता को देखती हुई तनीषा कह रही थी – “पिताजी मुझे आप पर गर्व है “।
( स्वरचित)अनामिका जोशी “आस्था”

0
united ink

United By Ink

Leave a Reply

Your email address will not be published.

×

Hello!

Click on our representatives below to chat on WhatsApp or send us an email to ubi.unitedbyink@gmail.com

× How can I help you?